Advocate Rudra Vikram Singh

काकरोचों और परजीवियों (Paracites) का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था द्वारा निवेदन

सेवा में
श्रीमान मुख्य न्यायाधीश महोदय उर्फ़ भगवान जी ( Your Lordship),
सर्वोच्च न्यायालय
भारत !
विषय – काकरोचों और परजीवियों (Paracites) का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था द्वारा निवेदन !

भगवान जी (Your Lordship),
फर्स्ट जनरेशन लॉयर्स एसोसिएशन कल दिनांक 15.05.2026 से पहले प्रथम पीढ़ी के अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था थी, पर कल के आपकी टिप्पणी के बाद यह संस्था कीड़े मकोड़ो या स्पष्ट तौर पर कहें तो काकरोचो और परजीवियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था बन चुकी है, क्यूँकि भगवान जी (Your Lordship) सबसे ज़्यादा बेरोजगार प्रथम पीढ़ी का अधिवक्ता ही है, कोई बड़ा चैम्बर उसे काम पर नहीं रखता, उसके पास ना चैम्बर है ना कार्यालय तो उसके पास कोई क्लाइंट काम लेकर भी नहीं आता, चूँकि उसके पिता जी, दादा जी कभी भगवान ( जज) नहीं रहे या बड़े नामचीन अधिवक्ता नहीं रहे तो उसे सरकारे उसे अपने पैनल पर नहीं रखती, वकालत के शुरुआती दिनों का संघर्ष शायद उसे परजीवी या काकरोच बना देता है !

भगवान जी, क्या आपने BCI, सरकारों से कभी ये सवाल पूछा कि इन काकरोचो को पैदा किसने किया ? क्या करेंगे आप इन काकरोचो का? क्या रोहिंग्याओ की तरह इन्हें भी समुंदर में धकेल देना चाहिए या इन्हें थोड़ा बहुत रोजगार मिले, इसके लिए आपको सरकारो को कुछ दिशा निर्देश जारी करना चाहिए !

भगवान, क्या देश की संसद द्वारा पास आरटीआई एक्ट के तहत RTI डालना कोई अपराध है, अगर है तो कृपया इस एक्ट को संविधान पीठ बिठा कर असंवैधानिक करार दे दीजिए,
क्या संस्थानों पर सार्थक टिप्पणी करना देशद्रोह है, यदि है तो पूर्व में उन सभी जजेज पर देशद्रोह का मुकदमा दायर करिए जिन्होंने अनुच्छेद 19 की व्याख्या करने के लिए हजारों पेज की जजमेंट लिखवाया, या सीधे सीधे हम ये भी कर सकते हैं कि जब संविधान पीठ बैठेगी तो धीरे से इस अनुच्छेद १९ को भी ख़त्म कर देते हैं,
अगर ये दो काम आपने अपने कार्यकाल में कर दिया तो यकीन मानिए कोई काकरोच नहीं पैदा होगा, क्यूंकि पैदा होते ही सरकारें उन्हें जेल में डाल देंगी !

आज देश में जब तमाम पत्रकारो पर सिर्फ खबर लिखने पर जेल हो जा रही है, उस समय आपकी यह टिप्पणी सरकारों के इस कृत्य को बढ़ावा देती है, आज जब एक युवा वकील को अपने क्लाइंट के लिए बहस करने के एवज में हाई कोर्ट 24 घंटे की कस्टडी में भेज देती है तो आपकी यह टिप्पणी ऐसे न्यायाधीशों के कृत्यों पर उत्प्रेरक का काम करती है !

भगवान जी, यह देश विश्व में सबसे ज़्यादा युवाओं वाला देश है, सबसे ज़्यादा ऊर्जा इस युवाशक्ति में है, अगर इस युवाशक्ति को काम नहीं मिलेगा तो ये काकरोच ही बनेगा !
भगवान जी, अगर आज स्वामी विवेकानंद जीवित होते तो शायद आपकी इस टिप्पणी से सबसे ज़्यादा आहत होते, परंतु महोदय काकरोचो का प्रतिनिधित्व करने वाली यह संस्था बिलकुल भी आहत नहीं है, क्यूंकि हम काकरोच रूपी वकीलों को देश की व्यवस्था से यही उम्मीद है या यूँ कहिए कि कोई उम्मीद ही नहीं है, हमे उम्मीद है तो सिर्फ अपनी सोच और मेहनत पर !

भगवान जी, अन्य लोगो की तरह मैं आपसे ये कतई अनुरोध नहीं करूँगा कि आप अपनी टिप्पणी पर कोई खेद प्रकट कीजिए, क्यूँकि आपके खेद प्रकट करने से आपकी टिप्पणी और उस टिप्पणी से आघात हुए मेरे साथी कभी उबर नहीं पाएंगे !

अंत में मैं रीढ़ विहीन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अपने साथियों से ये निवेदन करूँगा कि कभी तो रीढ़ की हड्डी सीधी कर के दो शब्द अपने अधिवक्ता साथियों के लिए भी बोलिए, हमे पता है कि आप लोगो की इतनी चलती है कि आप माननीय न्यायालय के आदेश को कुछ ही दिनों में बदलवाकर अपने अनुरूप अगले वर्ष के लिए भी अपनी सीट सुनिश्चित कर चुके हो पर फिर भी यदि थोड़ा सा भी बुरा लगा हो तो जरूर बोलिए !

धन्यवाद
रुद्र विक्रम सिंह
अध्यक्ष
परजीवियों और काकरोचो का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था ( First Generation Lawyers Association)
Mob- +91-9873425354

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